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दस्तक तिरे संवेदना पर

एक अविष्कार कैसे किसी समाज को संवेदन रहित बना सकता है इसका प्रमाण गुजरात की कोचिंग में लगे आग नेे स्पष्ट कर दिया......वैसे यह संवेदनहिनता आज की बात नहीॆ है.....यदि याद हो तो कुछ समय पहले एक तश्विर केेविन कार्टर द्वारा लिया गया जिसमे एक बच्चे और उसके पीछे बैठे गिद्द को दिखाया गया था.....जो यह स्पष्ट कर रहा था की गिद्द बच्चे के मरने की ताक देख रहा था और इस संवेदन रहित पिक्चर के नाम पर केेविन को पुलिट्जर  अवार्ड दिया गया था जो अवार्ड देने और लेने वाले दोनों की संवेदना को जग जाहिर कर रहा था....कुछ ऐसा ही आज देखने को मिला जब सड़क के लोग और मिडीया पिक्चर बना रही थी और वह फायर ब्रिगेड का वेट कर रही थी.....यह वह भीड़ थी जो  गुजरात की कोचिंग में लगे आग की तमासा देख रही थी किसी के पास यह जुगाड़ तक न आया की इन बच्चो को बचाया केसे जाये.....यदि कार्टर की इन्टरव्यु को सुना जाये तो वो बताते हुए मिलते है कि "फोटो लेने के बाद गिद्द को भगा दिया था"
लेकिन एक भी बार उनके जेहन में यह न आया की ंमेरे जाने के बाद भी गिद्द आ सकता था और शायद यही उनके डिप्रेशन का कारण भी जो उनके आखरी खत से पता चलता है......संभवत गुजरात के लोगों को जो फोटो बना रहे थे 

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"उन्हें लाशेंघायल बच्चेदर्द की तस्वीरें रह-रह कर परेशान न करे हैं हो सकता है वो डिप्रेश न हो लेेकिन जिस तरह मोबाईल की अविष्कार ने उन्हें या पुरे समाज को संवेदन रहित बना दिया है कल यही अविष्कार उनको डिप्रेश कर देगा और क्राटर की तरह आत्महत्या करने पर मजबूर कर देगा"   


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