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दस्तक उसकी चीख पर



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तुम आदम की जाति के हो
सच कहनाकी तुम आदम की जाति के हो,

वो बेटी जिस पर जुल्म किया तुमने

वो बेटी जिस पर बर्बरता की हद पर किया तुमने

वो हव्वा की बेटी कल ही तो मुस्काई थी,

जो नन्हें नन्हें पैरो से अभी चलना सीखा था

जो तूटे-तूटेशब्दों से अभी अब्बु कहना सीखा था

जो टिमटिम करते आँखो से अभी ख्वाब सजाना सीखा था

जो नन्हें नन्हें हाथों से अभी बादल पकड़ना सीखा था
तुमने उसको काट दिया

                                            
                                        अरे सच कहना! की तुम आदम की जाति के हो

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